. पी जी एस संग नए सत्र का आगाज़ 


  नए – नए सपनो को लेकर, 
देखो नया सत्र है आया l 

      नव उल्लास, नई आशाएं, 
      मन में हैं नूतन जिज्ञासाएं l 
तन -मन हर्षित, जीवन  सरसित,
अंतर -बाहर सब प्रकाशित l 
     सुख स्वप्नों  की सहस्र रस धारा हो रही प्लावित,  
    मानस -भू पर इस पल होने लगते नवाशांकुर प्रस्फुटित l 
नए – नए सपनों को लेकर, 
देखो नया सत्र है आया l 
          आओ ! मिलकर श्रम संकल्प उठाएं, 
           निज भव्य भविष्य – प्रासाद  बनाए l    
भग्न अभिलाषाओं से कुंठित मन को, 
आंदोलित कर, लक्ष्य रत्न को पा जाएं l 
            मग अवरोधित करने वाले, 
            अवरोधों का वंश मिटाएं l 
आओ ! हम अपने सपनों को, 
अमली जामा पहनाए l 
           लक्ष्य साधने को चिर अभिलाषित, 
           पी.जी.एस.संग नवाचार अपनाएं l
नए -नए सपनों को लेकर, 
देखो नया सत्र है आया l 
             गीता से सभ्य मनुज बन जाएं , 
             मन की निराशा को दूर भगाएं l 
योगा से तन सुंदर पाएं l 
निरोगी जीवन को अपनाएं l 
             अटल टिंकरिंग के माध्यम से, 
             विज्ञान जगत में अपना लौह मनवाएँ l 
सेवन हैबिट को अपनाकर, 
बुलंदियों को हम छू जाएं  l 
              जापानी भाषा और आई.बी.से, 
              एक नई वैश्विक पहचान बनाए l 
खेलों सुविधाओं का लाभ उठाकर, 
विश्व खेल जगत में शुमार कर जाएं l 
             पाथफाइंडर के प्रांगण में, आर्यावृत के  गौरवशालीइतिहास के  दर्शन कर जाएं  l 
राष्ट्र -अस्मिता के प्रतीक पटौदी प्राइड से, 
निज उर में राष्ट्र प्रेम की अलख जगाएं l 
             आओ पाथफाइंडर में पढ़कर, 
             अपने अरमानों को पंख लगाएं l 
भविष्य के स्पर्धा -समर हेतु हम एक,  
बहु रण विधा कुशल योद्धा बन जाएँ l 
               एक सही निर्णय लेकर हम, 
               अपना जीवन सफल बनाए l 
 नए -नए सपनों को लेकर, 
 देखो नया सत्र है आया l 


2. गीता माहात्म्य

भारत की ये शान है गीता l
जन -जन का अभिमान है गीता l
मुक्ति का वरदान है गीता l
जीवन का सच्चा ज्ञान है गीता l
भव -सागर में भटके मनुज को,
राह दिखाता आकाश -दीप है गीता l
मानव मन में छाए तम का,
नाशक है ये आदित्य स्वरूपा गीता l
जीवन की समस्याओं, शंकाओं एवं संदेहों का,
निर्वाण करने वाला बीज मंत्र है गीता l
पाँच सहस्र वर्ष पूर्व समर-भू पर सृजित,
जीवन का अनुपम सार है गीता I
मानव के कल्याण एवं उत्थान का,
एक भव्य आलोक-पथ है गीता l
गीता पथ पर चलने वाला,
हर मंजिल पा जाता है l
आदर्श जन तो बनता ही है,
आदर्श समाज भी बनाता है l
पाथफाइंडर का ध्येय भी है,
आदर्श छात्र की करना रचना l
छात्रों का सर्वांगीण उत्थान करना,
है पाथफाइंडर परिवार का पावन सपना l
इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर हमने,
गीता को पाठयक्रम बनाया अपना l
आओ मिलकर गीता-ज्ञान अपनाए l
एक सभ्य समाज बनाएं l l


3.इतिहास के सृजनहार

जो लोग नहाते पानी से,

केवल लिबास बदल कर रह जाते हैं l

जो लोग नहाते श्रम बूंदों से,

इतिहास वही रच पाते हैं l

क्यों निराश हुए जाते हो तुम ?

क्यों मग से भटके जाते हो ?

है कौन बाधा मग की ?

जिससे तुम घबराते हो l

उठो ध्येय को धारकर तुम,

लक्ष्य साधना में जुट जाओ,

विगत विफलताओं को मथकर,

पीयूष सफलता का निकाल लाओ l l

विचार करो क्यों विफल हुए,

क्या कमी रह गई जो पिछड़े ?

जो बीत गई सो बात गई,

अब पछताने का अर्थ नहीं l

जो जीवन सुधा बूँदे,

आलस्य अनल की भेंट चढ़ी l

लाख ग्लानि करने पर भी न वे,

अब पुनः मिलने वाली l

अब मन में केवल यह भान रहे,

लक्ष्य पर अपने कौन्तेय सा ध्यान रहे l

एकलव्य सी निष्ठा हो और भागीरथ सा उद्योग करो,

अपने ध्येय के अर्जन हेतु आशुतोष सा हठयोग करो l

अब विचार तुम्हे ही करना है,

किस पथ को अपनाते हो l

क्या नीर बहाकर केवल तुम,

निज तन को चमकाते हो ?

या श्वेद वृष्टि से अपनी,

एक नया इतिहास बनाते हो ?

 
     4. मेरा जीवन -सम्बल      
        tanuja

5. रवींद्रनाथ टैगोर

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6. गर्मी रानी

बच्चों को यह खूब है भाती,

उनका प्यारा बचपन लौटाती l

         छुट्टियों की सौगात देकर,

         पढाई की ये टेंशन भगाती I

मौज – मस्ती ये खूब कराती,

सैर -सपाटों पर ले जाती l

         आइसक्रीम, शरबत, ठंडाई का,

         जमकर बच्चों पर प्यार लुटाती l l

नाना-नानी के घर जाना,

बुआ के बच्चों का आना,

          मिलकर खूब धमाल मचाना,

          सब गर्मी के कारण हो पाता l

जो बचपन कहीं छूट है जाता,

किताबों से दबकर कहराता l l

          गर्मी रानी के कारण ही,

          बसंत बहार-सा खिल पाता l

सबको झुलसा -झुलसाकर यह,

बच्चों की पीड़ा पर क्रोध जताती l

         पर झुलसाती गर्मी रानी,

         बच्चों को है नहीं सताती l l

यह तो बच्चों को मौज करवाकर,

उनका खोया प्यारा बचपन लौटाती l 

        इसी लिए तो गर्मी रानी,

        हम बच्चों को है खूब भाती l